परिचयः

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) द्वारा ‘B’ श्रेणी से सम्मानित शासकीय स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय सतना (म.प्र.) विंध्य क्षेत्र मे उच्च शिक्षा का प्रतिष्ठित संस्थान है जो अकादमिक गुणवत्ता, आधुनिक-मानव मूल्यों एवं विवेक सम्मत संस्कारों से सृजित व्यक्तित्व निर्माण तथा उच्चस्तरीय अनुसंधान की दिशा में युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है। 1958 मे अपनी स्थापना के अनन्तर इस महाविद्यालय ने अपनी सफलता की एक लम्बी यात्रा पूर्ण की है। सतना जिले मे उच्च शिक्षा का यह प्राचीनतम संस्थान है।

1958 मे इस संस्थान ने अपनी यात्रा स्नातक कक्षाओं के साथ आरंभ की। 1966 मे इस संस्थान को स्नातकोत्तर महाविद्यालय का स्तर प्राप्त हुआ। आरंभ मे महाविद्यालय सागर विश्वविद्यालय, सागर (म.प्र.) से सम्बद्ध था। 1969 मे अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा (म.प्र.) की स्थापना के साथ महाविद्यालय की सम्बद्धता परिवर्तित होकर इस नये विश्वविद्यालय से हो गयी।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा 1972 मे 2(एफ) एवं 1991 मे 12 (B) के अंतर्गत महाविद्यालय को मान्यता प्रदान की गयी। महाविद्यालय की अकादमिक गुणवत्ता को चिन्हित करते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने इसे सर्वप्रथम अकादमिक सत्र 1995-96 से स्वशासी दर्जा प्रदान किया जिसे वर्तमान मे इसे सत्र 2020-21 तक उपलब्ध है। राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद ने जनवरी 2013 मे महाविद्यालय को ‘बी’ श्रेणी प्रत्यायित की जो जनवरी 2018 तक वैध होगी।

स्थापना वर्षः

सन् 1958

संचालित संकायः

महाविद्यालय मे तीन संकाय संचालित है-

1. कला एवं समाज विज्ञान संकाय

2. वाणिज्य एवं प्रबन्धन संकाय

3. विज्ञान संकाय

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